ऐसा करके वे माता से शांति की प्रार्थना कर सकते हैं.
* हर रोज कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी होती हो तो काली इस तरह की घटनाएं भी रोक देती हैं।
नोट : उपरोक्त में से किसी एक मंत्र का ही प्रयोग करें।
यह समय आत्मज्ञान और ईश्वर के करीब जाने का अवसर प्रदान करता है।
हर दिन अलग-अलग देवी का आह्वान और मंत्र जाप करें।
इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.
* पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं।
जीवनरक्षक मां काली : माता काली की पूजा या भक्ति करने वालों को माता सभी तरह से निर्भीक और सुखी बना देती हैं। वे अपने भक्तों को सभी तरह की परेशानियों से बचाती हैं।
* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें।
साधक को मनोवांछित सिद्धियां और फल प्राप्त होते हैं।
भुवनेश्वरी : ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
कलश में गंगाजल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल, चंदन, और दूर्वा डालें।
यह समय साधक को here आत्म-चिंतन और आत्म-साक्षात्कार का अवसर देता है। ध्यान और तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।